
दैनिक किरनः देश में नया इनकम टैक्स एक्ट लागू हो गया है, जिससे वेतनभोगी कर्मचारियों और करदाताओं की आय, बचत और टैक्स कैलकुलेशन पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाना है। नए नियमों के लागू होने के साथ ही कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो आम लोगों की जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे।सबसे बड़ा बदलाव हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर किया गया है। अब कर्मचारियों के लिए HRA उनकी बेसिक सैलरी का 50% तक निर्धारित किया गया है, जिससे टैक्स छूट की गणना में बदलाव आएगा। साथ ही, HRA क्लेम करने के लिए अब कर्मचारियों को अपने मकान मालिक (एम्प्लॉयर नहीं, बल्कि लैंडलॉर्ड) की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिससे फर्जी दावों पर रोक लगाई जा सके।इसके अलावा, बैंक या अन्य स्रोतों से मिलने वाली सालाना ब्याज आय पर भी नया नियम लागू हुआ है। अब यदि किसी व्यक्ति की ब्याज आय ₹50,000 से अधिक होती है, तो उस पर TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटा जाएगा। यह कदम टैक्स कलेक्शन को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।परिवार और बच्चों से जुड़े खर्चों में भी राहत दी गई है। बच्चों के हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली टैक्स छूट को पहले ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, कर्मचारियों को मिलने वाले सालाना गिफ्ट पर टैक्स छूट की सीमा भी ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है।इन बदलावों के चलते अब कर्मचारियों को अपनी सैलरी स्ट्रक्चर और टैक्स प्लानिंग पर नए सिरे से विचार करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नया इनकम टैक्स एक्ट न केवल टैक्स सिस्टम को आधुनिक बनाएगा, बल्कि करदाताओं के लिए कुछ मामलों में राहत भी लेकर आएगा, जबकि कुछ नियम सख्ती भी बढ़ाएंगे।कुल मिलाकर, आज से लागू यह नया टैक्स सिस्टम आम आदमी की आय और खर्च के संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करेगा।


